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कोरोनावायरस रोग 2019 है क्या कैसे होता है और क्या है इसका रोकथाम हमें क्या रखना चाहिए सावधानी पढ़ें पूरी खबर

कोरोनावायरस रोग 2019

संक्रमण द्वारा इंसानों में फैलने वाली बीमारी
कोरोनावायरस रोग 2019 या कोविड-19 (COVID-19) एक प्रकार का संक्रामक रोग है, जो 2019 नोवेल कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) के कारण होता है। इस रोग का पता सबसे पहले चीन के वुहान शहर में 2019 को चला था। हालांकि तब तक ये पूरी दुनिया में फैल चुका था, जिसका परिणाम 2019–20 वुहान कोरोनावायरस महामारी के रूप में सामने आया। इसमें सामान्य लक्षणों में बुखारखांसी और सांस लेने में तकलीफ होना शामिल है। कुछ मामलों में मांसपेशियों में दर्द, थूक का निर्माण और गले में खराश भी देखने को मिला है। अधिकतर मामलों में काफी हल्के लक्षण ही होते हैं और सिर्फ कुछ मामलों में ये बढ़ कर निमोनिया या कई अंगों के विफल होने तक भी पहुँच जाते हैं। जांच किए जा रहे मामलों में प्रति व्यक्ति मौतों का प्रतिशत 3.4% है, जिसमें व्यक्ति का उम्र और स्वास्थ अलग अलग हैं।

संकेत और लक्षण
इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में हो सकता है कि किसी भी प्रकार का कोई लक्षण न दिखे या फ्लू जैसे कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिसमें बुखार, खांसी, थकान और सांस में तकलीफ शामिल है।कुछ आपातकालिन स्थितियाँ पैदा करने वाले लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, सिने में दर्द या दबाव, भ्रम, जागने में कठिनाई, और चेहरे या होंठों में जलन शामिल है। यदि ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत अपनी जांच कराएं। कुछ कम सामान्य लक्षणों में छींक आना, नाक का बहना, गले में खराश होना देखा गया है। कुछ लोगों में मतली, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण भी दिखाई दिये हैं। चीन के कुछ मामलों में सीने में जकड़न और अस्वस्थता देखने को मिला था। कुछ ऐसे मामलों में जिसमें कोई अन्य लक्षण नहीं दिख रहे थे, उन्हें कोई गंध नहीं आ रहा था, या वे स्वाद पहचान नहीं पा रहे थे।कुछ मामलों में ये बीमारी निमोनिया या कई अंगों के विफल होने तक बढ़ जाती है और मृत्यु हो जाती है। जिन लोगों में गंभीर लक्षण दिखाई दिये हैं, जिसके लिए उन्हें मैकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता पड़े, उन्हें यह लक्षण दिखने में लगभग 8 दिन का समय लगा था।

कारण

यह रोग SARS-CoV-2 नामक वायरस के कारण होता है, जिसे पहले 2019 नोवेल कोरोनावायरस (2019-nCoV) के नाम से जाना जाता था। यह मुख्य रूप से खांसी और छींक के दौरान निकलने वाली बूंदों से लोगों में फैलता है। वायरस के क्षय की जांच करने वाले एक अध्ययन से पता चला है कि ये तांबे पर 4 घंटे, कार्डबोर्ड पर 24 घंटे, स्टैनलेस स्टील पर 72 घंटे, और प्लास्टिक पर 72 घंटे के बाद दिखाई नहीं दिये थे। हालांकि उन वायरस का पता लगाने की दर 100% नहीं हुई और यह अलग अलग सतह पर भिन्न-भिन्न थी। (पता लगाने की सीमा ऐरोसोल के लिए 3.33×100.5 TCID50 प्रति लीटर, प्लास्टिक, स्टील और कार्डबोर्ड के लिए 100.5 TCID50 प्रति मिलिलीटर और तांबे के लिए 101.5 TCID50 प्रति मिलीलीटर था। बायेसियन रिग्रेशन मॉडल के साथ क्षय की दर का अनुमान बताता है कि यह वायरस तांबे में 18 घंटे, कार्डबोर्ड पर 55 घंटे, स्टैनलेस स्टील पर 90 घंटे, और प्लास्टिक पर 100 घंटे तक रह सकता है। 3 घंटे के प्रयोग के दौरान यह पूरे समय ऐरोसोल में दिखाई दे रहा था। यह वायरस मल में भी पाया गया है, और इसके माध्यम से इसके संचरण पर अभी शोध किया जा रहा है।

चाव के उपाय करने से संक्रमित होने की संभावना काफी कम हो जाती है। संक्रमण से बचने के लिए अन्य कोरोनावायरस के लिए छापे गए उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • जितना हो सके, घर पर रहें और यात्रा या सार्वजनिक कार्य करने से बचें।
  • अपने हाथ साबुन और गरम पानी से अक्सर धोते रहें।
  • अपने हाथ बिना धोये अपनी आँखों, नाक और मुंह को न छूएँ।

इसके अलावा समाज से दूरी बनाना भी एक अच्छी रणनीति है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने को रोका जा सकता है। इसके लिए  किसी भी प्रकार के भीड़ को इकठ्ठा न होने देना प्रमुख उपाय है।

WHO के अनुसार मास्क का इस्तेमाल सिर्फ उन्हें करना चाहिए, जिन्हें खांसी या सर्दी है या उन्हें जो ऐसे किसी की देखभाल कर रहे हैं, जिसे यह रोग होने का शक है।

रोकथाम:-

सीडीसी और संयुक्त राष्ट्र के सलाह के अनुसार संक्रमण को रोकने के लिए सभी लोग घर पर ही रहें और केवल इलाज हेतु ही बाहर जाएँ। किसी चिकित्सकीय संस्था में जाने से पहले कॉल कर लें और किसी ऐसे जगह जाते हैं, जहां संक्रमण का खतरा हो, तो चेहरे का मास्क भी पहन लें। सर्दी या खांसी होने पर रुमाल या टिशू पेपर का इस्तेमाल करें और अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएँ। सीडीसी की सलाह है कि लोग अपने हाथ कम से कम 20 सेकंड तक साबुन या हैंड वॉश से धोएँ। खास कर टॉयलेट जाने पर या हाथ गंदे दिखने और खाना खाने से पहले या नाक साफ करने के बाद। यदि साबुन और पानी न मिले तो ही अल्कोहल वाले हाथ सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें, जिसमें कम से कम 60% अल्कोहल हो। WHO की सलाह है कि सभी लोग गंदे हाथों से अपने आँख, नाक और मुंह को छूने से बचें और सार्वजनिक जगहों पर धुकने से भी बचें।


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