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कोटा: मासूम नवजातों की मौत का ज़िम्मेदार कौन- ग्राउंड रिपोर्ट

कोटा: मासूम नवजातों की मौत का ज़िम्मेदार कौन- ग्राउंड रिपोर्ट


टोनू और रेखा

कोटा के जेके लोन अस्पताल से तक़रीबन अस्सी किलोमीटर दूर बारां गांव के अंतिम छोर पर बने एक हरे रंग के मकान में रहने वाले युवा दम्पति टोनू और रेखा गोंड़ के नवजात शिशु ने बीती 23 दिसंबर को अस्पताल में दम तोड़ दिया. मृत्यु के वक़्त रेखा और टोनू का बेटा सिर्फ़ तीन दिन का था.
पिछले 36 दिनों में कोटा के जेके लोन अस्पताल में दम तोड़ने वाले 110 बच्चों में से वह भी एक था.
पीले फूलों वाली लाल जुराबों, पुरानी साड़ी और हरी शॉल में सिमटी बैठी रेखा शुरुआती जनवरी की ठंड में ठिठुर रही थी. चेहरे पर गहरी उदासी चिपकी हुई थी.
नवजात के बारे में पूछने पर कुछ देर के लिए शून्य में देखती रहीं. फिर मद्धम आवाज़ में बोलीं, "सिर्फ़ तीन दिन का था इसलिए नाम भी नहीं रख पाए थे. मेरे पास तो तीन दिन में से सिर्फ़ एक रात रहा. ठीक से देखा भी नहीं उसे. चेहरा भी याद नहीं".
अपनी गर्भनाल से नौ महीने तक सींचने के बाद भी, अपने ही बेटे का चेहरा याद करने की कोशिश करती 21 वर्षीय रेखा के चेहरे पर दुख की गहरी लकीरें खिंच आईं थीं.

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