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एक विशाल उल्कापिंड तेजी से धरती की ओर आया और अपनी चमक बिखेरता हुआ हमारे ग्रह के नजदीक से गुजर गया। अब यह साल 2079 में वापस लौटेगा।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक जुलाई 1998 में नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में नियर-अर्थ एस्ट्रॉयड ट्रैकिंग कार्यक्रम द्वारा उल्कापिंड 1998 OR2 की खोज की गई थी, और पिछले दो दशकों से खगोलविदों ने इसे ट्रैक किया है। नतीजतन, इसकी ऑरबिटल ट्रैजेक्टरी को बहुत सटीक रूप से समझा जा सका है, और विश्वास के साथ कहा जाता है कि यह एस्टेरॉयड कम से कम अगले 200 वर्षों तक धरती पर प्रभाव की संभावना नहीं रखता है। अगली बार यह पृथ्वी के निकट 2079 में होगा, जब यह करीब से गुजर जाएगा - केवल चंद्र दूरी का लगभग चार गुना।
अंतरिक्ष में गोते खाता धरती की ओर बढ़ रहा
प्यूर्टोरिको स्थित वेधशाला से ली गई रडार तस्वीरों से बने एक वीडियो में उल्कापिंड अंतरिक्ष में गोते खाते हुआ पृथ्वी की ओर बढ़ा चला आ रहा है। यह धरती से 6.3 मिलियन किमी की दूरी से गुजरेगा। इस विशाल उल्कापिंड के करीब आने से ठीक पहले नासा के मुताबिक एक छोटे आकार का उल्कापिंड धरती के बगल से गुजरा है। जो आकार में 4 से 8 मीटर था और धरती से इसकी दूरी 36400 किमी थी, यह दूरी उतनी ही जितनी दूर आसमान में मानव निर्मित जियोसिंक्रनस सैटेलाइट रहती हैं।
खगोल वैज्ञानिक मास्क पहनकर रख रहे उल्कापिंड पर नजर
एक विशाल उल्कापिंड तेजी से धरती की ओर आया और अपनी चमक बिखेरता हुआ हमारे ग्रह के नजदीक से गुजर गया। अब यह साल 2079 में वापस लौटेगा।
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जिस अद्भुत खगोलीय घटना के लिए वैज्ञानिक बरसों इंतजार करते हैं वैसी ही एक घटना हमारे ब्रह्मांड में बुधवार को घटी। जब एक विशाल उल्कापिंड जिसे संभावित खतरनाक श्रेणी में रखा गया है 29 अप्रैल को धरती के करीब से गुजरा तेजी से अपनी चमक बिखेरता हुआ गुजर गया। Asteroid (52768) 1998 OR2, 29 अप्रैल को पृथ्वी के करीब पहुंचा। इस विशाल अंतरिक्ष चट्टान का अनुमानित व्यास 1.1 से 2.5 मील (1.8 से 4.1 किलोमीटर) है, या अमेरिका के मैनहट्टन आइलैंड के बराबर चौड़ा है। प्यूर्टोरिको स्थित ऑब्जर्वेटरी ने डॉपलर रडार से इसकी जो तस्वीरें ली हैं उसमें यह ऐसा नजर आया जैसे उसने फेस मास्क पहन रखा है।
Just a few minutes ago at 11:56 SAST, Asteroid 1998 OR2 passed at a distance of 6.3 million km; 16 Lunar Distances from Earth. At ~2km across it is one of the largest potentially hazardous asteroids known to exist. This video was taken last night by Willie Koorts #1998OR2 वीडियो देखने के लिये👇
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अंतरिक्ष में गोते खाता धरती की ओर बढ़ रहा
खगोल वैज्ञानिक मास्क पहनकर रख रहे उल्कापिंड पर नजर
कोरोनावायरस महामारी के चलते, आरसीबो के खगोलविज्ञानियों को ज्यादातर रेडियो ऑब्जर्वेशन दूर से करने पड़ रहे हैं। हालांकि, प्लानेटरी रडार ऑब्जर्वेशन के लिए एक वैज्ञानिक व एक रडार ऑपरेटर आब्जर्वेटरी में साइट पर हैं। जो भी सीमित कर्मचारी यहां है वे मास्क पहनने समेत कोविड-19 के प्रसार से जुड़ी तमाम सावधानियों का पालन कर रहे हैं। प्यूर्टोरिको जहां यह आब्जर्वेटरी स्थित है अभी तक कोरोनवायरस के 1400 मामले सामने आए हैं और इसकी वजह से 84 लोगों की जान गई है। प्यूर्टोरिको वेधशाला जहां एक विशाल दूरबीन (टेलीस्कोप) से इस उल्कापिंड पर नजर रखी जा रही है, दुनिया की महत्वपूर्ण वेधशालाओं में से एक है। आरसीबो टेलीस्कोप ने बुध व शुक्र ग्रह जोवियन सैटेलाइट, शनि ग्रह के वलयों और उपग्रहों के अलावा अनेकों उल्कापिंडों व धूमकेतुओं के बारे में जानकारी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरसीबो वेधशाला का रेडियो टेलीस्कोप ऑप्टिकल टेलीस्कोप को वैकल्पिक दृष्टिकोण उपलब्ध कराता है। यह नजर आने वाली गैस की पहचान कर अंतरिक्ष के ऐसे हिस्सों के बारे जानकारी जुटा सकता है जो कॉस्मिक धूल से ढंके हो सकते हैं।
पृथ्वी से चंद्रमा की तुलना में लगभग 16 गुना दूर
वास्तव में, निकटतम होने पर, लगभग 1.5-मील-चौड़ा (2.4 किमी) 1998 OR2 अभी भी पृथ्वी से चंद्रमा की तुलना में लगभग 16 गुना दूर होगा। (चंद्रमा 239,000 मील या 385,000 किमी की औसत दूरी पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है।)


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