AM अबतक न्यूज़
कमल महंत की कलम से
कोरबा(पाली):- रुपए और सिक्के के प्रचलन में आने के बाद यूं तो वस्तु विनियम अब बीते दिनों की बात हो गई लेकिन पाली थाना सीमान्तर्गत ढाबा मालिकों और हाइवा-ट्रेलर व टैंकर चालकों के बीच वस्तु विनियम का खेल आज भी जारी है।जिसमे टायर पंचर दुकान भी इस खेल में परस्पर सम्मिलित है।
ढाबों में भोजन और शराब के बदले डीजल लेने की प्रथा इन दिनों चल पड़ी है।इसके अलावा टायर पंचर दुकान जहाँ भरपूर तरीके से डीजल-पेट्रोल लेने का कार्य जारी है।इस प्रथा के चलते जहां वाहन मालिक कंगाली के दौर से गुजर रहे है वहीं ढाबा तथा टायर दुकान संचालक डीजल-पेट्रोल बेचकर मालामाल बन रहे है।आज पाली से बिलासपुर मुख्यमार्ग पर बगदेवा के मध्य अधिकांश ढाबा एवं टायर पंचर दुकानों में वस्तु विनियम का यह खुला खेल बेखौफ धड़ल्ले से जारी है।जिसमे पाली नगर सीमा के राघवेंद्र ढाबा के अलावा कोरबा जिले की सीमा पर चेंपा स्थित एहसान टायर दुकान, इलताफ टायर दुकान, तौहीद टायर, अयूब टायर व विराट ढाबा जहां कोयला लोड तथा डीजल-पेट्रोल लेकर अपने गतंव्य की ओर निकलने वाले भारी वाहनों के ड्राइवर अब पेट्रोल-डीजल खपाने लगे है।रही बात ढाबों की तो वाहन चालक खाना और शराब की कीमत रुपए के बजाए डीजल-पेट्रोल से चुकाने लगे है।तथा टायर दुकानों में डीजल-पेट्रोल की खरीदी-बिक्री में तो मानों पौ बारह की तर्ज पर चल रहा है।इस तरह चालकों को जहाँ ढाबों में शराब-कबाब के बदले अंटी ढीला करने की जरूरत नही हो रही तो वहीं टायर पंचर दुकानों में भी दो नंबरी का शुद्ध आय प्राप्त हो रहा है।जहाँ ढाबा व टायर पंचर मालिक भी बहुमूल्य हो चुके डीजल-पेट्रोल को आने-पौने दाम पर पाकर काफी खुश हैं तथा अपने द्वारा तय दाम पर बेचकर दिन दूनी रात चौगुनी अपना सिक्का खनका रहे है।इस गोरखधंधे का गंभीर पहलू यह है कि भारी वाहनों के मालिक कंगाली के दौर से गुजर रहे है तो दूसरी ओर डीजल-पेट्रोल खरीदी में मस्त ढाबा और टायर पंचर के दुकान खुला रूप से डीजल-पेट्रोल विक्रय केंद्र बन गए है।मजेदार बात यह है कि वस्तु विनियम के इस खेल से पाली पुलिस भी वाकिफ है।लेकिन मामला जिला पुलिस प्रशासन के कार्यवाही का होना बताकर उक्त अवैध कृत्य से पल्ला झाड़ लिए है ऐसे में वस्तु विनियम के इस खेल में सेटिंग भारी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
कमल महंत की कलम से
कोरबा(पाली):- रुपए और सिक्के के प्रचलन में आने के बाद यूं तो वस्तु विनियम अब बीते दिनों की बात हो गई लेकिन पाली थाना सीमान्तर्गत ढाबा मालिकों और हाइवा-ट्रेलर व टैंकर चालकों के बीच वस्तु विनियम का खेल आज भी जारी है।जिसमे टायर पंचर दुकान भी इस खेल में परस्पर सम्मिलित है।
ढाबों में भोजन और शराब के बदले डीजल लेने की प्रथा इन दिनों चल पड़ी है।इसके अलावा टायर पंचर दुकान जहाँ भरपूर तरीके से डीजल-पेट्रोल लेने का कार्य जारी है।इस प्रथा के चलते जहां वाहन मालिक कंगाली के दौर से गुजर रहे है वहीं ढाबा तथा टायर दुकान संचालक डीजल-पेट्रोल बेचकर मालामाल बन रहे है।आज पाली से बिलासपुर मुख्यमार्ग पर बगदेवा के मध्य अधिकांश ढाबा एवं टायर पंचर दुकानों में वस्तु विनियम का यह खुला खेल बेखौफ धड़ल्ले से जारी है।जिसमे पाली नगर सीमा के राघवेंद्र ढाबा के अलावा कोरबा जिले की सीमा पर चेंपा स्थित एहसान टायर दुकान, इलताफ टायर दुकान, तौहीद टायर, अयूब टायर व विराट ढाबा जहां कोयला लोड तथा डीजल-पेट्रोल लेकर अपने गतंव्य की ओर निकलने वाले भारी वाहनों के ड्राइवर अब पेट्रोल-डीजल खपाने लगे है।रही बात ढाबों की तो वाहन चालक खाना और शराब की कीमत रुपए के बजाए डीजल-पेट्रोल से चुकाने लगे है।तथा टायर दुकानों में डीजल-पेट्रोल की खरीदी-बिक्री में तो मानों पौ बारह की तर्ज पर चल रहा है।इस तरह चालकों को जहाँ ढाबों में शराब-कबाब के बदले अंटी ढीला करने की जरूरत नही हो रही तो वहीं टायर पंचर दुकानों में भी दो नंबरी का शुद्ध आय प्राप्त हो रहा है।जहाँ ढाबा व टायर पंचर मालिक भी बहुमूल्य हो चुके डीजल-पेट्रोल को आने-पौने दाम पर पाकर काफी खुश हैं तथा अपने द्वारा तय दाम पर बेचकर दिन दूनी रात चौगुनी अपना सिक्का खनका रहे है।इस गोरखधंधे का गंभीर पहलू यह है कि भारी वाहनों के मालिक कंगाली के दौर से गुजर रहे है तो दूसरी ओर डीजल-पेट्रोल खरीदी में मस्त ढाबा और टायर पंचर के दुकान खुला रूप से डीजल-पेट्रोल विक्रय केंद्र बन गए है।मजेदार बात यह है कि वस्तु विनियम के इस खेल से पाली पुलिस भी वाकिफ है।लेकिन मामला जिला पुलिस प्रशासन के कार्यवाही का होना बताकर उक्त अवैध कृत्य से पल्ला झाड़ लिए है ऐसे में वस्तु विनियम के इस खेल में सेटिंग भारी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

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