AM अबतक न्यूज़
कमलेश पालिया की खबर
कनकी जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम कनकी में प्रतिवर्ष प्रवासी पक्षी एशियन ओपन बिल स्टार्क सात समंदर पार कर भारी संख्या में मानसून का पैगाम लेकर आते हैं।
इस वर्ष भी श्रीलंका, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों से विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन हुआ है जो कनकेश्वर मंदिर प्रांगण के वृक्षों में अपना घोंसला बनाकर रह रहे हैं एवं वंश बढ़ाने की तैयारी में है। प्रवासी पक्षी में नर मादा दोनों शामिल रहते हैं जो प्रजनन काल के दौरान उसमें अण्डा देते हैं। माह अगस्त, सितंबर में अण्डों से बच्चे निकलने के ये उनका पालन पोषण करते हुए बड़ा करते हैं। बारिश के दिनों में आंधी, तूफान एवं बारिश होने पर इनके बच्चें घोंसला से नीचे गिरकर हताहत हो जाते हैं।
प्रतिवर्ष प्रवासी पक्षियों के कई बच्चों की मौत आंधी, तूफान के कारण वृक्षों से नीचे गिरने से होती है। जिसे देखते हुए पक्षियों के प्रति प्रेम भाव रखने वाले ट्रांसपोर्ट नगर कोरबा निवासी पर्यावरण प्रेमी संजय जोशी जी आगे आये और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए एक मुहिम शुरू किए। प्रवासी पक्षी के बच्चे घोंसला से नीचे न गिरे इसके लिए उन्होंने स्वयं के खर्चे से मंदिर प्रांगण के सभी वृक्षों में जाल लगवाये हैं । उन्होंने बताया कि जाल में गिरकर घायल हुए पक्षी के बच्चों को मंदिर के समीप मंच में तार जाली लगाकर रखने की व्यवस्था की गई है ताकि हम उनका इलाज करा सके और उनके ठीक हो जाने के बाद उन्हें फिर घोंसला में छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि पक्षियों की चहचहाहट एवं कलरव से मेरे दिल को सुकून मिलता है। प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने से बेवजह उनकी मौत नही होगी और आगामी वर्ष में उनकी संख्या में वृद्धि होगी। इन बेजुबान पक्षी का सहारा बनकर उनकी सुरक्षा में हम सदैव तत्पर रहेंगे। पर्यावरण प्रेमी संजय जोशी जी ने प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया एवं सुरक्षा व्यवस्था करने ग्रामीणों से सहयोग लिया।
कमलेश पालिया की खबर
कनकी जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम कनकी में प्रतिवर्ष प्रवासी पक्षी एशियन ओपन बिल स्टार्क सात समंदर पार कर भारी संख्या में मानसून का पैगाम लेकर आते हैं।
इस वर्ष भी श्रीलंका, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों से विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन हुआ है जो कनकेश्वर मंदिर प्रांगण के वृक्षों में अपना घोंसला बनाकर रह रहे हैं एवं वंश बढ़ाने की तैयारी में है। प्रवासी पक्षी में नर मादा दोनों शामिल रहते हैं जो प्रजनन काल के दौरान उसमें अण्डा देते हैं। माह अगस्त, सितंबर में अण्डों से बच्चे निकलने के ये उनका पालन पोषण करते हुए बड़ा करते हैं। बारिश के दिनों में आंधी, तूफान एवं बारिश होने पर इनके बच्चें घोंसला से नीचे गिरकर हताहत हो जाते हैं।
प्रतिवर्ष प्रवासी पक्षियों के कई बच्चों की मौत आंधी, तूफान के कारण वृक्षों से नीचे गिरने से होती है। जिसे देखते हुए पक्षियों के प्रति प्रेम भाव रखने वाले ट्रांसपोर्ट नगर कोरबा निवासी पर्यावरण प्रेमी संजय जोशी जी आगे आये और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए एक मुहिम शुरू किए। प्रवासी पक्षी के बच्चे घोंसला से नीचे न गिरे इसके लिए उन्होंने स्वयं के खर्चे से मंदिर प्रांगण के सभी वृक्षों में जाल लगवाये हैं । उन्होंने बताया कि जाल में गिरकर घायल हुए पक्षी के बच्चों को मंदिर के समीप मंच में तार जाली लगाकर रखने की व्यवस्था की गई है ताकि हम उनका इलाज करा सके और उनके ठीक हो जाने के बाद उन्हें फिर घोंसला में छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि पक्षियों की चहचहाहट एवं कलरव से मेरे दिल को सुकून मिलता है। प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने से बेवजह उनकी मौत नही होगी और आगामी वर्ष में उनकी संख्या में वृद्धि होगी। इन बेजुबान पक्षी का सहारा बनकर उनकी सुरक्षा में हम सदैव तत्पर रहेंगे। पर्यावरण प्रेमी संजय जोशी जी ने प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया एवं सुरक्षा व्यवस्था करने ग्रामीणों से सहयोग लिया।
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संजय जोशी |




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