*हिंदुस्तान की आजादी हमें बाहमी इत्तेहाद से हासिल हुई : पूर्व आई ए एस अनीस अंसारी*लखनऊ
*माताओं के पाक़ीज़ा (पवित्र) किरदार से हिंदुस्तान की आजादी नसीब हुई : मौलाना जहांगीर आलम कासमी*
*हिंदुस्तान की आज़ादी में मुस्लिम महिलाओ का हिस्सा पर सेमिनार*
लखनऊ : हिंदुस्तान की आज़ादी में मुस्लिम महिलाओं का हिस्से पर मौज़ू एक रोज़ा सेमिनार आज़ाद वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी के तहत बा इश्तेराक क़ौमी काउंसिल बाराए उर्दू ज़बान मुकाम फलाहे मिलत हाल गोलागंज लखनऊ में मुन्ंकिद हुआ प्रोग्राम की सदारत साबित आईएएस जनाब अनीस अंसारी निजामत मारूफ शायर रिजवान फारुकी ने अंजाम दी जब के मेहमान ए खुसूसी की हैसियत से मौलाना जहांगीर आलम कासमी डॉक्टर सुधीर प्रताप भटनागर ने शिरकत की मेहमानों खुसूसी मौलाना जहांगीर आलम क़ासमी ने कहा के आज हमें ज़रूरत है कि मर्द और औरतों में हिंदुस्तान की आज़ादी में माताओं के किरदार को फरामोश नहीं किया जा सकता, जिन्होंने अपने बच्चों को मादर ए वतन की आज़ादी के लिए तैयार किया, ज़रा सोचिए जब माताओं का किरदार पाकीजा है फल भी अच्छा ही होगा, माताओं के पाक़ीज़ा किरदार से हमें हिंदुस्तान की आजादी नसीब हुई हिंदुस्तान एक गुलशन की तरह है जिसको हमारी माताओं ने संवारा है हिंदुस्तान की आज़ादी में औरतों के किरदार को क़यादत तक फरामोश नहीं किया जा सकता कुर्बानियों के बाद हमें आज़ादी नसीब हुई इस को याद करने की ज़रूरत है साबिक़ आई ए एस जनाब अनीस अंसारी ने कहा जब हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए बिगुल बजा तो महात्मा गांधी ने औरतों की शराकत को पहली तरजीह में रखा और साना बा शाना शामिल किया हिंदुस्तान की आज़ादी हिंदू और मुस्लिम नुक्ता ए नज़र से नहीं लड़ी गई बल्कि समाज के तमाम तबक़ात मर्द और औरतों को शामिल कर लड़ी गई उसी का नतीजा है कि आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं हिंदुस्तान की आज़ादी हमें बाहमी इत्तेहाद से हासिल हुई डॉक्टर सुधीर प्रताप भटनागर ने कहा मर्द के शाना बा शाना औरतों ने भी जंगे आज़ादी में हिस्सा लिया मारूफ शायर रिज़वान अहमद फारूकी ने जंग ए आज़ादी में औरतों का कारनामा बहुत रोशन और नुमाया है जिन्हें किसी तौर पर फरामोश नहीं किया जा सकता, साहाफी गुफरान नसीम के मुताबिक औरतों के जिगर के बगैर जंगे आज़ादी की तारीख़ अधूरी है इसके अलावा डॉक्टर खुर्शीद जहां मौलाना सैयद अली हुसैन क़ुम्मी ने भी अपने ख़्यालात का इजहार किया इस मौके पर मोहतरमा तौसीफ जहां नुज़हत शाहाब, डॉ नुज़हत ख़ान, मोहम्मद अफाक, फारुख आदिल, मोहम्मद मेराज, मोहम्मद शोएब अल्वी, वकार एहसन, मोहसिन खान, वगैरा मौजूद थे, कन्वीनर मोहम्मद कमाल अख्तर ने मुकर्ररीन और शुरका का शुक्रिया अदा किया
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