आर्थिक असमानताओं और विद्वेष का* *भारत* ।
इस सरकार के सत्ता में आने के बाद जिस नया भारत निर्माण करने का स्लोगन दिया था
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आर्थिक असमानताओं और विद्वेष का* *भारत* ।
इस सरकार के सत्ता में आने के बाद जिस नया भारत निर्माण करने का स्लोगन दिया था उसका असली चेहरा उनके आठ साल के कार्यकाल में असफलता-छल- कपट के रूप में सामने आने लगा हैं। नया भारत का झलक उनके आठ वर्षो के कार्यकाल में आर्थिक असमनताओं- राष्ट्रीय परिसंपत्तियों की लूट और धार्मिक विद्वेष के रूप में देखा जा सकता हैं।सिर्फ चमकदार और लुभावनी नारों और आम जनता को भ्रमित करने तक नया भारत का स्लोगन सीमित हैं।
इस नया भारत में अमीरी और गरीबी की खाई को और चौड़ीकरण किया गया हैं।आर्थिक असमानता और तीव्र हुआ हैं। 2021 के ऑक्सफाम (oxfam)रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में प्रति 33 घंटों में 10 लाख लोग नये सिरे से गरीब हो रहे है वही दूसरी तरफ प्रति 33 घंटो में दुनियां में एक(1)नया धनी( जिनके पास 100 करोड़ डालर की सम्पत्ति हैं) व्यक्ति का उदय हो रहा हैं। 2022 के विश्व असमानता रिपोर्ट में भारत की स्थिति उपर में हैं।
2020 के रिपोर्ट के अनुसार भारत में सबसे गरीब जनता की आय में 13% की कमी आई हैं।जबकि देश के सबसे धनी व्यक्तियों कुल राष्ट्रीय सम्पदा का 57% का मालिक है और शीर्ष के 1% धनी व्यक्तियों के पास राष्ट्रीय सम्पदा का 22% पर कब्जा हैं।विश्वबैंक के अनुसार जिन परिवार की दैनिक आय 1.90डालर या 148₹ से कम है उन परिवारों को गरीब माना जाता हैं।विश्वबैंक के इस मापदंड को आधार मानकर ऑक्सफाम रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022 में भारत के 26.30 करोड़ लोग नये सिरे से गरीब होने जा रहा हैं।
फोर्ब्स (Forbes) प्रति वर्ष दुनियां में धनी व्यक्तियों की सूची प्रकाशित करता हैं।फोर्ब्स की इस सूची में भारत के 135 करोड़ आबादी में दुनियां के धनी व्यक्तियों की सूची में 100 (धनी)लोगो का नाम शामिल किया जाता हैं और इन 100 लोगो को ही सामने रखकर पूरे देश में विकास व तरक्की होने का प्रचार किया जाता हैं।फोर्ब्स की सूची में शीर्ष के दस बिलिनियरों की सूची भी प्रकाशित होता हैं।
मोदी राज में पिछले 8 वर्षों में मुकेश अम्बानी की सम्पत्ति में 400% और गौतम अडानी की सम्पत्ति में 1830% की बढोतरी हुई हैं।वर्ष 2014 में अम्बानी की सम्पत्ति ₹ 1.68 लाख करोड़ से ₹7.90 लाख करोड़ तक पहुंच गया हैं वही अडानी की सम्पत्ति 50 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 8.35लाछ करोड़ रूपये तक पहुंच गया हैं।जो वर्तमान मे एशिया का सबसे धनी व्यक्ति हैं।राधाकृष्ण दमानी जो वर्ष 2014 में 7100 करोड़ रूपये के सम्पत्ति के मालिक थे आज ,1.42 लाख करोड़ रूपये सम्पत्ति के मालिक हैं ।देश के 100 धनी व्यक्तियों में वे चौथे स्थान पर है जबकि 2014 में उनका स्थान एकदम नीचे था।
सरकार ने धनी गरीब जनता को राहत देने बदले कार्पोरेट घरानों को ही छुट देकर उनको उपकृत कर रही हैं। कार्पोरेट कर(corporate Tax) जो पहले 30% वसूला जाता है उसे घटाकर 22% कर कार्पोरेट घरानों को राहत दिया गया हैं।नये उद्योग के लिए कर में 25% से 15% कटौती किया गया है।जिससे देश के राजस्व प्राप्ति में ₹1.45लाछ करोड़ का नुकसान होना हैं।किसानों के बैंक कर्ज माफ करने के बदले सरकार कार्पोरेट घरानों के 1072 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया हैं।तथाकथित नुकसान में चलने वाली उद्योगों की कुल बैंक देनदारी 5.5 लाख करोड़ से कम कर 1.61लाख करोड़ रूपये कर देने से बैंको को 2..85 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होना हें।बैंको में आम जनता के बचत के पैसों को किस तरह से यह सरकार कार्पोरेट को लाभ पहुंचा रही हैं।
कार्पोरेट लूट,गरीबी,असमानता,आर्थिक संकट से ग्रसित लोगों के आंदोलन को रोकने के उद्देश्य से ही शासक वर्ग को एक ऐसी राजनैतिक पार्टी की आवश्यकता हैं जो देश में हिंसा और आतंक का माहौल पैदा कर सके।संसद में गृह राज्यमंत्री द्वारा दिए जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में 51, 606 हिंसा की घटनाए हुए है जिसमें 85% ही धार्मिक या साम्प्रदायिक हिंसा हैं।
यह नया भारत हमारे देश की अनेकता में एकता की बुनियादी अवधारणा पर ई हमला कर रही हैं।
सुखरंजन नंदी
राज्य समिति सदस्य
छत्तीसगढ किसान सभा
मो 9406230650
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