चाकाबुड़ा।
भारी बारिश में महीनों पहले क्षतिग्रस्त हुआ देवरी पुल आज भी बदहाली की हालत में पड़ा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सुक्लाखार से बुंदेली को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग पूरी तरह टूट चुका है, जिससे रोजाना हजारों राहगीरों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रशासन की निष्क्रियता के चलते ग्रामीणों को खुद आगे आना पड़ा। आसपास के गांवों के सरपंचों ने आपसी सहयोग से पुराने छोटे पुल पर मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता तैयार कराया, ताकि बांकीमोंगरा जाने वाले लोगों को किसी तरह राहत मिल सके। यह अस्थायी व्यवस्था कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल टूटने के बाद से आज तक न तो निरीक्षण हुआ और न ही निर्माण की कोई समय-सीमा तय की गई। स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने जा रहे हैं, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों की देरी हो रही है और किसान अपनी फसल बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
महीनों से लंबित पुल निर्माण ने प्रशासनिक संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। क्षेत्र में भारी आक्रोश है और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही देवरी पुल का पुनर्निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
👉 अब सवाल यह है कि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा या समय रहते जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?
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