कटघोरा | AM अबतक
कटघोरा को जिला बनाए जाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर ज़ोर पकड़ती नजर आ रही है। कटघोरा अधिवक्ता संघ ने आज से जिला दर्जे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अधिवक्ताओं के इस आंदोलन से क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है।
धरना स्थल पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेश पाल ने बताया कि वर्ष 2021 से 2023 तक कांग्रेस शासनकाल में भी कटघोरा को जिला बनाने की मांग को लेकर करीब दो वर्षों तक आंदोलन चला था। उस दौरान सर्व समाज और सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिला, लेकिन वर्ष 2022 में चार नए जिले बनने के बावजूद कटघोरा को नजरअंदाज कर दिया गया।
राजेश पाल ने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कटघोरा दौरे के दौरान अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन सौंपकर दोबारा मांग रखी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे अधिवक्ताओं और आम जनता में गहरी नाराजगी है।
अधिवक्ता संघ के सचिव अमित सिन्हा ने कहा कि पूर्व आंदोलन के दौरान कांग्रेस सरकार के विधायक और सांसदों ने जिला बनाए जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनभावनाओं की अनदेखी का परिणाम यह रहा कि जनता ने कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया।
अमित सिन्हा ने आगे कहा कि वर्तमान में कटघोरा से भाजपा विधायक चुने गए हैं और कोरबा से लखनलाल देवांगन राज्य सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में कटघोरा की जनता को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार से पूरी उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ की सबसे पुरानी तहसीलों में शामिल कटघोरा को अब जिला का दर्जा मिलेगा।
⚠️ संघ की चेतावनी
अधिवक्ता संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि इस बार भी कटघोरा की जनता के साथ छल हुआ तो अधिवक्ता संघ और क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी। संघ ने स्पष्ट किया कि कटघोरा को जिला घोषित होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना-प्रदर्शन के चलते कटघोरा में प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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