लॉक डाउन का पाचवा छठवा दिन ही हुआ इन्हें भुखमरी आ गई..1 सप्ताह का राशन अमूमन सबके घर मे होता है। लोग कह रहे हैं गरीब पलायन कर रहे हैं।
मकानमालिक ने किराएदारों को एक माह का किराया माफ ही कर दिया है। जब कहा गया है कि 21 दिन लॉक डाउन कीजिए। जो जहाँ हैं वहीं रहिए... व्यवस्थाएँ की जाएगी। संकट का समय है थोड़ा बर्दास्त करना पड़ेगा। रिलीफ़ फण्ड में लोग लाखों-करोड़ो दे रहे हैं वो इसलिए नही दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अपनी जेब मे रखेंगे...वो ग़रीब-मजदूर भाइयों के लिए ही दे रहे हैं। सबको सहायता मिलेगी लेकिन इस तरीके से लाखों की भीड़ में गांव भागने से कोई सहायता मिल जाएगी ये कैसे संभव हो पायेगा। सरकार आपके घर सहायता भेजेंगी या सड़क पर ये तो आपको खुद तय करना होगा। सारे NGO-संगठन सब आगे आएं हैं मदद के लिए ये इसलिए नही आए हैं कि आप पैदल गांव निकल लो। दिक्कत ही नही बड़ी चुनौती है लेकिन लोगों को समझना होगा।
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